"Well sourced foreign policy website”
~ The Washington Post
"Excellent Swoop foreign policy analysis"
~ Financial Times
“A remarkably well-plugged-in website”
~ Daily Telegraph |
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वाशिंगटन की दुनिया ११ मई – १७ मई २००९
पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और इज़्रायली राष्ट्रपतियों की वाशिंगटन यात्रा के दौरान काफी चहल पहल रही। जैसे कि हम पहले चर्चा कर चुके हैं, पाकिस्तान के भविष्य को लेकर ख़तरा बराबर बढ़ रहा है। प्रशासन के अधिकारी हमें बताते हैं कि राष्ट्रपति बराक ओबामा समझते हैं कि उन्हें राष्ट्रपति ज़रदारी से इस आशय के संतोषजनक आश्वासन मिले हैं कि वे तालिबान विद्रोह को परास्त करने के प्रति प्रतिबद्ध हैं। लेकिन क्या ज़रदारी अपना वादा निभा पायेंगे? इस प्रश्न के उत्तर के प्रति कोई भी आश्वस्त नहीं है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हमें बताया कि कठिनाई यह है कि हमारी पाकिस्तान से बातचीत उसी पुराने ढर्रे पर होती है। हम अपनी मांगे पेश करते हैं, वे अपने वादे दुहराते हैं पर बदलता कुछ भी नहीं”। पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और मध्यपूर्व शांति-प्रक्रिया के संबंध में नये विचारों का आभाव है। अब सुन रहे हैं कि रुस केन्द्रित एक नये विचार पर चर्चा हो रही है। जैसा कि हमें बताया गया है, इसका संबंध मास्को और वाशिंगटन के मध्य होने वाले एक बड़े लेन-देन से है। इसका मूल अर्थ यह है कि रूस द्वारा ईरान पर अपना परमाणु कार्यक्रम समाप्त कराने का दबाव डालने के बदले में अमरीका पूर्वी योरोप मे मिसल प्रतिरक्षा संस्थान लगाने का अपना विचार त्याग देगा और न ही यूक्रेन तथा जोर्जिया को नेटो में शामिल करने के प्रयासों पर ही बल देगा। यह विचार अभी समीक्षा के स्तर पर ही है लेकिन हम समझते हैं कि इस विषय पर विदेश मंत्री हेलरी क्लिंटन और उनके रूसी समकक्ष लावारोव की ७ मई की बैठक में कुछ साधारण से बातचीत हुई है। इस विचार के पक्ष में तर्क यह है कि अमरीका के रूस के साथ संबंधों में स्थायित्व लाया जा सकेगा। उसके बाद मध्यपूर्व, अफ़ग़ानिस्तान तथा आतंकवाद से संबंधित कुछ नये और दिलचस्प विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं। बकौल राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के एक सलाहकार के: ”अब हम यह समझ गये हैं कि शायद तेहरान का रास्ता मास्को होकर जाता है”।
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