"Well sourced foreign policy website”
~ The Washington Post
"Excellent Swoop foreign policy analysis"
~ Financial Times
“A remarkably well-plugged-in website”
~ Daily Telegraph |
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वाशिंगटन की दुनिया १२ मई - १८ मई २००८
राष्ट्रपति बुश की इज़्रायल, मिश्र और सऊदी अरब यात्रा से पहले कुछ अपशगुन हो रहे हैं। इज़्रायल में उच्च नेतृत्व की हैसियत पर संदेह बढ़ रहा है। लेबनान में अमरीकी अधिकारियों को गंभीर गृह-युद्ध भड़क उठने का ख़तरा है। जैसा कि हम पहले कह चुके हें, इस तरह के वातावरण में बुश और भी दृढ़ प्रतिज्ञ हो जाते हैं। अगर लेबनान में कानून व्यवस्था टूटती है तो बुश मज़बूती से लेबनानी सरकार का समर्थन करेंगे। हमारे व्हाइट हाउस के सूत्र बताते हैं कि उन्हें व्हाइट हाउस छोड़ने से पहले किसी प्रकार का मध्यपूर्व समझौता होने की पूरी आशा है। निजी तौर पर अमरीकी अधिकारी यह स्वीकार करते हैं कि बजाय किसी मूलभूत समझौते के, किसी प्रकार के, बकौल उनके, घोषणात्मक समझौते की संभावना अधिक है। बुश की यात्रा का कार्यक्रम काफी लचीला है। अगर वे बग़दाद में रुके तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये। यदि ऐसा होता है तो उन्हें वहां की सैनिक और राजनीतिक स्थिति उससे कहीं अधिक निराशाजनक आंकलन सुनना पड़ेगा जोकि उन्हें पिछले महीने जनरल पेट्रेयस ने वाशिंगटन में दिया था। पेंटागन के सूत्र बताते हें कि मुक्तदा अल-सद्र के ख़िलाफ़ अमरीकी कार्रवाई में “अमरीका-विरोधी शिया राष्ट्रवाद की आग भड़क उठने का जोखिम मौजूद है”। अगर अमरीका-विरोधी मिलिशा को मिलने वाली ईरानी सहायता के ख़िलाफ़ बुश प्रशासन कोई कार्रवाई करता है तो उसका नतीजा क्या होगा? इस प्रश्न पर वाशिंगटन में सघन बहस जारी है। प्रशासन के अधिकारियों से अपने बातचीत के आधार पर, हम किसी सीमा-पार सीमित हमले का बढ़ता हुआ जोखिम तो ज़रूर देखते है पर फिर भी यह समझते हें कि ऐसा तब तक नहीं होगा जब तक कोई ऐसी घटना नहीं होती जिसमें भारी संख्या में अमरीकी हताहत हों। बर्मा में आपदा-राहत को लेकर भारत और चीन के साथ भी तनाव बढ़ रहा है। अमरीकी अधिकारियों को बर्मा की सैनिक सरकार के विदेशी सहायता के जानकारों को स्वीकार न करने के फ़ैसले पर भारी निराशा है और वे इसे बदलने के लिये चीनियों और भारतीयों द्वारा रंगून पर पर्याप्त दबाव न डालने का दोष मड़ते हैं।
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