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बृहत मध्यपूर्व: रियाद और वाशिंगटन में अनबन

Published on: December 17th 2006 21:11:59
  प्रिंस तुर्की अल फ़ैज़ल का वाशिंगटन में सऊदी अरब के राजदूत पद से अजानक स्तीफ़े का कारण अभी भी रहस्य बना हुआ है। उन्हें एक लंबे समय से रियाद से अपर्याप्त समर्थन की शिकायत तो ज़रुर थी लेकिन उनके जाने का कारण शाही परिवार में इराक को लेकर बने मतभेद लगता है। (उनके पूर्ववर्ती प्रिंस बंदर व्हाइट हाऊस के साथ एक विश्वसनीय बिचौलिये की भूमिका निभाते थे जो प्रिंस तुर्की को नपंसद थी) एक वैकल्पिक व्याख्या यह भी है कि राजकीय उत्तराधिकारी के चुनाव में एक पीढ़ी को नज़रअंदाज़ करने की रियाज़ में चर्चा है और उस हालत में वहां उनकी मौजूदगी ज़रुरी थी। जो भी हो, अमरीकी अधिकारी अब उन सऊदी चेतावनियों पर गौर से ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं जिनमें कहा गया था कि इराक में अव्यवस्था बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकती है और जिसमें सुन्नी अरब जगत से स्वयंसेवक और धन आयेगा। इस सोच ने आई० एस० जी० की सिफ़ारिशों को पीछे धकेल दिया है। विशेषकर, मध्यपूर्व में शांति प्रक्रिया में अमरीकी भूमिका को फिर से तेज़ करने की सिफ़ारिश पर राइस और बेकर में मतभेद पैदा हो गये हैं। बेकर विदेश मंत्री के रुप में उनके बास रह चुके हैं। हम सुनते हैं कि राइस ने इन शब्दों में बेकर को फटकारा: मैं नियमित रूप से क्षेत्र का दौरा तो ज़रुर करूंगी लेकिन न तो मैं ओछी लेनदेन की माहिर हूं और न ही मेरी ऐसी कोई इच्छा ही है। व्हाइट हाऊस के अधिकारी बताते हैं कि यह टिप्पणियां बुश और चेनी की हमास के फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण में रहते हुये इज़्रायल पर किसी प्रकार का दबाव डालने की अनिच्छा का बहुत सही प्रदर्शन करती हैं।

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