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ईरान: निगाह से दूर, ध्यान से दूर नहीं

Published on: December 10th 2006 20:28:42
 प्रशासन का ध्यान इराक पर केन्द्रित रहने के कारण, ईरान सुर्ख़ियों से फ़िलहाल ओझल है। लेकिन इस मुद्दे पर उच्च-स्तरीय ध्यान बराबर बना हुआ है। पांच दिसंबर को विदेश मंत्रालय के तीसरे बड़े अधिकारी निक बर्नस ने अपने ब्रिटिश, जर्मन, फ़्रासंसी, रुसी और चीनी समकक्षों से पेरिस में मुलाकात करके सुरक्षा परिषद के ईरान पर प्रतिबंध लगाने के अगले कदम पर चर्चा की। यह बात अलग है कि इन वार्ताओं का कोई स्पष्ट नतीजा नहीं निकला। लेकिन हमें पूर विश्वास है कि प्रशासन फ़िलहाल वार्ताओं के रास्ते के प्रति प्रतिबद्ध है। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि बुश का धैर्य असीमित नहीं है। व्हाइट हाऊस के एक अधिकारी ने हमें बताया कि अगर बुश यह समझेंगे कि ईरान वार्तओं की आड़ में परमाणु अस्त्र प्रौद्योगिकी में महारथ हासिल करने में जुटा है तो वे अन्य विकल्पों पर विचार करने से पीछे नहीं हटेंगे। सऊदी भी ईरानियों के खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते हुये प्रभाव के विरुद्ध बुश को चेतावनी दे रहे हैं। विदेश मंत्रालय का ईरान‍-सीरिया कार्यवाही संगठन और प्रतिरक्षा मंत्रालय का इराकी निदेशालय ईरान के प्रति अधिक दमदार नीति अपनाने की राय दे रहे हैं। अतीत में गेट्स ने ईरान से संपर्क बढ़ाने की बात तो ज़रूर कही थी लेकिन अपनी नियुक्ति की पुष्टि के लिये हुई सिनेट में सुनवाई के दौरान उन्होंने ईरानियों को ठीक लोग नहीं बताया। प्रशासन के बाहर इज़्रायल प्रोजेक्ट तथा अमेरिकन पोलिसी ऐसोसियेशन जैस संस्थान ईरान के साथ टकराव के लिये संसद में जनमत तैयार कर सकते हैं। हेलरी क्लिटंन जैसे डैमोक्रैटिक नेता ईरानी परमाणु कार्यक्रम की सार्वजनिक रुप से आलोचना कर चुके हैं। डैमोक्रैट यह भी सोच सकते हैं कि ईरान के ख़िलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग करने से उनकी राष्ट्रपति बनने की संभावनायें सशक्त हो सकती हैं। इसलिये, हमारी राय यही है कि सैनिक कार्यावाही की संभावना को शून्य नहीं समझना चाहिय।

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