Sign in |  Weekly Newsletter |  Personalize RSS Feeds |   News Feeds

भाषा बदलें   Arabic    Chinese    English   Hindi    Japanese    Korean    Persian

  

इराक: जोखिम पर नज़र

Published on: December 3rd 2006 19:53:58
विदेश मंत्रालय के अधिकारी निजी तौर पर अब यह मानते हैं कि इराक की स्थिति में सुधार नहीं हो सकता। उनका कहना है कि अमरीकी विकल्प जिस तेज़ी से चुक रहे हैं उससे लगता है कि आई० एस० जी० के प्रस्ताव बेमतलब हो जायेंगे। बुश द्वारा प्रधानमंत्री नौरी अल-मालीकी का सार्वजनिक रुप से अनुमोदन का अर्थ है कि अमरीका निकट भविष्य में उनसे बंध गया है। प्रतिरक्षा मंत्रालय में यह चर्चा अब बंद हो गई है कि मालीकी से असंतोष के चलते (जैसा की स्वूप के १३ नवंबर के अंक में प्रकाशित हुआ था), शिया नेता मुक्तदा अल सद्र को महत्व दिया जाये। मुक्तदा एक संभावना थी, ऐसा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के एक अधिकारी ने हमें बताया था। वे एक राष्ट्रवादी हैं और इराकी अंखड़ता में विश्वास रखते हैं। आम लोगों में भी उनका दबदबा है। हम उन्हें मुख्यधारा में लाना चाहते थे। हम सुनते हैं कि मुक्तदा द्वारा मालीकी की बुश से मुलाकात के विरोध के बाद, यह विकल्प विचाराधीन नहीं है। अमरीकी समाचार माध्यमों में उनकी (मुक्तदा की) छवि इराक के सबसे ख़तरनाक आदमी की है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हमें बताया कि अगर आगे देखें तो लगता है कि इराकी नीति अधर में लटकी है। हम सिर्फ़ आशा ही कर सकते हैं कि सब कुछ ठीक ठाक ही होगा। दिन प्रति दिन हमारा स्थिति से नियंत्रण उठता जा रहा है। चिंता का एक अन्य कारण है क्षेत्र के अमरीकी मित्रों, विशेषकर सऊदी अरब के वाशिंगटन में भूतपूर्व राजदूत शहज़ादा बंदर बिन-सुल्तान, के अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश। शहज़ादा बंदर दो बार गुप्त रुप से अमरीका आकर इराक संकट के देश की सीमा से बाहर फैलने की चेतावनी दे गये हैं। वाशिंगटन में किसी के पास स्थिति का स्पष्ट उत्तर नहीं है। इस बीच, जनसमर्थन बराबर गिर रहा है।       

मुख्य पृष्ठ | लेख | पिछले अंक | आप के सुझाव | हमारे बारे में | संपर्क | विज्ञापनदाता | Disclaimer