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अतिथि लेख: तेल नीचे डालर ऊपर

Published on: December 3rd 2006 19:52:16
कभी-कभार प्रकाशित किये जाने वाले अतिथि लेखकों की लेख श्रंखला का पहला लेख यहां दिया जा रहा है। लेखक एक अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनी से संबद्ध है। उनका तर्क है कि तेल के दामों का गिरना बराबर जारी रहेगा और डालर मज़बूत होगा। तेल के दामों में गिरावट डालर के मूल्य को बढ़ायेगी। जैसे कि दुनिया भर में ब्याज दरों में वृद्धि हो रही है, तो तरल-धन, जिससे वस्तुओं और वास्तविक संपदा में जान आती है, वह सिमिट रहा है। यही हालत इन संपत्तियों के मुल्यों की भी है। अब तक तेल के दामों आई में २० डालर की गिरावट से अमरीका को चालू खाते में ११५ अरब डालर प्रति वर्ष का लाभ हुआ है। इसका मतलब है कि अमरीकी बजट के घाटे में २० प्रतिशत की कमी। इस स्थिति में मुद्रास्फिति का दबाव कम होना चाहिये और जो पैसा तेल पर ख़र्च होता उसे  उपभोगता और व्यापार उत्पादक कामों में लगा रहे हैं। इसलिये, अमरीकी डालर का वास्तविक मूल्य बढ़ना चाहिये। (ऊंजी ब्याज दरे, डालर की बाज़ार में कम आमद और मुद्रास्फिति में कमी)। बाकी विश्व के मुकाबले प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य के रुप में, अमरीकी डालर योरो से (५७.६ %) भारी पड़ता है, इसलिये उसकी भविष्य में कीमत या तो योरोपीय संघ के अंतरीय वास्तविक विकास या अंतरीय वास्तविक ब्याज दरों या दोनों पर निर्भर करेगी। वर्ष २००६ तक तो दोनों अर्थ व्यवस्थाओं में बराबर की होड़ लगी है। लेकिन अब भूराजनीतिक जोखिमों का उतना महत्व नहीं है और तेल की विश्व में इतनी बहुयतायत है कि तेल उत्पादक देशों को उत्पादन में कटौती करनी पड़ रही है। अमरीकी डालर और तेल के दामों के अनुपात को इतने अच्छे दौर में प्रवेश करना चाहिये जहां डालर की कीमत में हो रही वृद्धि तेल उत्पादक देशों को मुल्यों में गिरावट से होने वाली क्षति की उसकी क्रय शक्ति के रुप में भरपाई करेगी। इस स्थिति में अमरीकी जोखिम सिर्फ़ आवास क्षेत्र में है और अगली दूसरी या तीसरी तिमाही में अमरीकी सकल घरेलु उत्पाद (GDP) में कमज़ोरी आयेगी क्योंकि मकानों की मांग में कमी से इस क्षेत्र की नौकरियां जायेंगी, घरेलू उपकरणों, डी० आई० वी० तथा फ़र्नीचर की मांग कम होगी। लेकिन आगे चल कर, सभी वर्ग एक नई समान स्थिति की तरफ बढ़ेंगे तो ऐसा लगता है कि डालर मज़बूत होगा क्योंकि कच्चे तेल के दाम और गिरेंगे।

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