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चीन/भारत: अमरीका ख़बरदार

Published on: December 3rd 2006 20:02:45
अमरीकी अधिकारी बड़ी दिलचस्पी से चीनी राष्ट्रपति हो जिनताओ की भारत यात्रा का अध्ययन कर रहे हैं। भारत और चीन दोनों से अपने अच्छे संबधों को देखते हुये, भारत-चीन संबधों में सुधार से अमरीका को, सिद्धांत रुप में, चिंतित होने का कोई कारण नहीं है लेकिन विदेश मंत्रालय के अधिकारी हमे बताते हैं कि वे चीन की हाल की कूटनीतिक उपलब्धियों (विशेषकर अफ्रीका में) से काफी सचेत हैं। वे कहते हैं कि चीन और भारत के सुडान और ईरान मे सांझे ऊर्जा हित हैं और वे नहीं चाहते कि अमरीकी हितों के ख़िलाफ़ भारत और चीन कोई गठबंधन खड़ा करें। वे इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि नवनियुक्त विदेश सचिव शिव शंकर मेनन अमरीका के बजाय चीन के अधिक समर्थक हैं। वे बेजिंग में भारत के राजदूत भी रह चुके हैं। अमरीका नहीं चाहता कि हो की यात्रा हाल के अमरीका-भारत गैर-सैन्य समझौते पर हावी हो। यही कारण है कि अमरीका अगले सप्ताह एक व्यापारिक विकास शिष्टमंडल भारत भेज रहा है। अवर वाणिज्य मंत्री फ़्रेंकलिन लेविन के नेतृत्व वाले इस शिष्टमंडल में १७५ उच्च अमरीकी कंपनियों के अधिकारी शामिल रहेंगे। शिष्टमंडल को आशा है कि विदेशी निवेष पर लगी रुकावटें और उद्योग संबधी संरक्षाणात्मक प्रावधानों के हटने से भारत का बाज़ार उनके लिये खुलेगा।   

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