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इराक: अध्ययन बहुत, समाधान कम

Published on: December 3rd 2006 20:00:18
इस समय वाशिंगटन इराक मामले पर अध्ययन बुख़ार से ग्रस्त है। कम से कम तीन अध्ययन इस समय जारी हैं इराकी अध्ययन दल (आई०एस०जी०), सेंटकाम तथा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद। अध्ययनो का यह प्रसार बुश को किसी विशेष सिफ़ारिश को महत्व देने से बचने का मौका देता  है। जैसे उदाहरण के लिये, अमरीका को ईरान और सीरिया से बातचीत शुरु करनी चाहिये। हम सुनते हैं कि पूर्व विदेश मंत्री जेम्स बेकर इस बात को लेकर परेशान हैं कि उनके आई०एस०जी० प्रस्तावों को सहानुभूतिपूर्वक स्वीकार किया जायेगा या नहीं। कुछ भी हो, इराकी राष्ट्रपति जलाल तालाबानी की तेहरान यात्रा (जिसकी अमरीकी अधिकारियों को पूर्व सूचना नहीं थी) पर उत्पन्न चिंता के कारण, प्रशासन ऐसे सभी विचारों का विरोध करेगा जिससे ईरानी प्रभाव की इराक में किसी प्रकार की वृद्धि हो। हम समझते हैं कि उपराष्ट्रपति डिक चेनी की सऊदी अरब यात्रा का एक उद्देश्य सऊदियों के ईरानी विरोध को सशक्त बनाना भी था। इराक में अमरीकी सैनिकों की संख्या मे वृद्धि या उनकी वहां से फ़ौरन वापिसी जैसे बड़े परिवर्तनों के रद्द होने के बाद, अब केवल मामूली से रणनीतिक फेरबदल की ही संभावना है। एक परिवर्तन यह हो सकता है कि अगले महीने जनरल रेमंड ओडीरनो अपनी इराक वापिसी पर गठबंधन बलों की फ़ील्ड कमान संभाल लें। पहले अपनी चौथी इनफैंटरी डिविज़न की कमान के दौरान ओडीरनो विद्रोहियों से बलशाली टकराव के पक्षधर थे। इसलिये संघर्ष की गति में तेज़ी भी एक विकल्प है। लेकिन इराक युद्ध के जनसमर्थन में बराबर हो रही कमी ने प्रशासन के विकल्प बहुत ही सीमित कर दिये हैं। जब तक अमरीकी नीति परिवर्तन से इराक में तेज़ी से हिंसा कम नहीं होती, हम समझते हैं कि अमरीकी बल वर्ष २००७ के शुरु में कुर्दिस्तान और कुवैत की ओर जाने शुरू हो जायेंगे।

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