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इराक: इराक सर्वे ग्रुप पर हो-हल्ला

Published on: November 19th 2006 21:31:56
इराक सर्वे ग्रुप की रिपोर्ट से ज़रुरत से कुछ ज़्यादा ही उम्मीदें लगाई जा रही हैं। हम समझते हैं कि ये पूरी होने वाली नहीं। हम अपने इस ग्रुप के सूत्रों से सुनते हैं कि दल पहले से ही मालूम इस बात की पुष्टि करेगा कि वर्तमान नीति कारगर नहीं है। हमारे व्हाइट हाऊस के एक संपर्क ने बताया कि राष्ट्रपति इस तथ्य से पूरी तरह वाकिफ हैं। सर्वे दल उन्हें सर्वजनिक  तौर पर नीति परिवर्तन की ज़रुरत स्वीकार करने का अवसर प्रदान करेगा। पर हमें यह प्रत्याशा नहीं है कि बुश बेझिझक सर्वे दल की रिपोर्ट स्वीकार करेंगे। इसलिये, उन्होंने स्वयं प्रशासन के अंदर इराक नीति की समीक्षा के आदेश दिये हैं। वरिष्ठ प्रशासकीय अधिकारी इराक की सुरक्षा समस्यायों की गम्भीरता को स्वीकार करने से इसलिये कतराते हैं कि खुले आम इसे कबूल करने से इराक में सरकार विरोधी तत्वों के हौंसले और बुलंद होंगे। राजदूत ज़ाल्मे ख़लीलज़ाद और जनरल जान अबिज़ायद ने अपनी १४-१६ नवंबर की वाशिंगटन यात्रा के दौरान निजी तौर पर यही संदेश दिया है। इसलिये बुश, सर्वे दल की इराक में अमरीकी मौजूदगी समाप्त करने या उसकी की समय-सारिणी की खुलेआम चर्चा संबधी सिफ़ारिशों का विरोध करेंगे। सर्वे दल का सबसे अधिक विवादास्पद प्रस्ताव सीरिया और ईरान के और अधिक उलझाव से संबधित होगा। पूर्व विदेश मंत्री जेम्स बेकर ने स्वयं राष्ट्रसंघ में ईरानी राजदूत जवाद ज़रीक से दोपहर के खाने पर लंबी बातचीत की है। विदेश मंत्रालय अब ईरान से वार्तालाप के प्रस्ताव को सिद्धांत रुप में तो स्वीकार करता है लेकिन उसके अंदर इस बात पर सहमति नहीं है कि इसे किस प्रकार शुरू किया जाये और उसमें किन किन विषयों को शामिल किया जाये। यह संभव है कि इस मतभेद से वार्तालाप या तो असफल हो जाये या शुरु ही न हो। ईरानी अधिकारियों से संपर्क रखने वाले गैर-सरकारी बिचौलियों से प्रशासन को संकेत मिल रहे हैं कि ईरानी अधिकारी किसी भी बातचीत के लिये कड़ी शर्ते रखेंगे।  

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