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विदेश नीति का दबदबा: निशाना ईरान

Published on: October 29th 2006 21:46:51
 जैसे जैसे इराक में पूर्ण सफलता की संभावनायें धूमिल पड़ रहीं हैं, वाशिंगटन के विदेश नीति विशेषज्ञ इराक में अमरीका की पराजय के रूप में देखे जाने वाले परिणाम का, अमरीका के वैश्विक हितों, विशेषकर अमरीका के क्षेत्रीय देशों और अन्य क्षेत्रीय विरोधियों पर पड़ने वाले प्रभाव की विवेचना करने लग गये हैं। उसी समुदाय के कुछ सदस्य जो इराक युद्ध के शुरू में समर्थक थे, उनका तर्क है कि अमरीकी सैन्य शक्ति का पर्याप्त  प्रयोग करके अमरीकी प्रतिष्ठा को बहाल करने की ज़रुरत है। उनका अघोषित लक्ष्य ईरान है। सैनिक कार्यवाही के समर्थक ईरान द्वारा अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमताओं के विकास की पुष्टि का इस्तेमाल इस तर्क के लिये कर रहे हैं कि ईरान कत्तई भरोसा करने लायक देश नहीं है और उसे केवल बल प्रयोग से ही काबू किया जा सकता है। इस विचार का प्रशासन में कुछ समर्थन ज़रूर है, विशेषकर चेनी के दफ्तर और वायु सेना में। लेकिन अमरीकी अधिकारी बताते हैं कि न तो बुश और न ही राइस युद्ध को आवश्यम्भावी समझतें हैं। वायु सेना के बाहर, अन्य सैनिक अधिकारियों ने व्हाइट हाऊस को चेतावनी दी है कि ईरान के विरुद्ध कार्यवाही बहुत ही जोखिम पूर्ण होगी। फिर भी रूझान नकारात्मक बनी हुई है, मूलरूप से इसलिये भी कि वाशिंगटन में किसी को भी प्रशासन द्वारा अपनाई गई प्रतिबंध लगाने की नीति की सफलता पर विश्वास नहीं है। हम बराबर यह समझते हैं कि वर्ष २००७ के मध्य में संकट पैदा होने की संभावना है। 

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