Sign in |  Weekly Newsletter |  Personalize RSS Feeds |   News Feeds

भाषा बदलें   Arabic    Chinese    English   Hindi    Japanese    Korean    Persian

  

चीन और अफ्रीका: अमरीका से प्रतिस्पर्धा

Published on: October 29th 2006 21:39:15
 चीन-अफ्रीका सहयोग फ़ोरम की नवम्बर ४-५ को बिजिंग में होने वाली शिखर बैठक को लेकर वाशिंगटन को कुछ परेशानी दिखाई पड़ रही है। इसमें ३० से अधिक अफ्रीकी शासनाध्यक्ष भाग लेंगे। कुल मिला कर अमरीका-चीन संबधों में ठहारव है लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकारी बताते हैं कि उन्हें इस बात को लेकर चिंता है कि चीन बराबर उन क्षेत्रों की खोज-ख़बर में लगा रहता है जहां अमरीका के दीर्घकालीन हित हैं। ऐसा लगता है कि चीन अफ्रीकी देशों के सामने पश्चिम का एक ऐसा वैकल्पिक माडल पेश करना चाहता है जिसमें मानवाधिकार और अच्छे प्रशासन जैसे एहम मुद्दे शामिल हैं। तीन क्षेत्र विशेष दिलचस्पी का कारण हैं: पूर्वी अफ्रीका (सुड़ान, चाड तथा सोमालिया), पश्चिमी अफ्रीका (नाईजीरिया तथा इक्वेडोरियल गिनी) और दक्षिणी अफ्रीका (दक्षिण अफ्रीका)। इन क्षेत्रों में अमरीका की दिलचस्पी ऊर्जा, मानवाधिकार और अच्छे प्रशासन में है। अमरीका विश्व बैंक के सहयोग से नाईजीरिया और दक्षिणी अफ्रीका को अपना स्थाई सांझेदार बनाने की आशा लगाये बैठा है और जहां से वह बाकी अफ्रीका को प्रभावित कर सकता है। रिपब्लिकन और डैमोक्रेट दोनों ही इस उद्देश्य का समर्थन करते हैं। अमरीका और चीन, हम दोनों के लिये अफ्रीका में गुंजायश है, विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, लेकिन अगर हम आपस में बेहतर तालमेल स्थापित नहीं करते तो यह सहयोग के बजाय तनाव का क्षेत्र बन सकता है 

क्या अमरीका की चीनी अफ्रीकी नीति संबधी चिंतायें सही है? फ़ीडबैक के लिये क्लिक कीजिये।

  

मुख्य पृष्ठ | लेख | पिछले अंक | आप के सुझाव | हमारे बारे में | संपर्क | विज्ञापनदाता | Disclaimer