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ऐ०पी०आई०सी०: दोहा की तैयारी

Published on: December 1st 2008 17:13:14

ऐ०पी०आई०सी० नेताओं की नवंबर २२-२३ की बैठक में राष्ट्रपति बुश की मौजूदगी ने व्हाइट हाउस को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और व्यापार संबंधी विषय-सूची बदलने का अंतिम अवसर प्रदान किया। वर्ष २००४ से, बुश प्रशासन ने संगठन को व्यापारिक उदारीकरण प्रक्रिया अपनाने के लिये ज़ोरदार मौखिक समर्थन प्रदान किया। इसका उद्देश्य एशिया-प्रशांत को मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाना था। लेकिन इसमें कोई विशेष प्रगति नहीं हुई। इसका कारण था ऐ०पी०आई०सी० की सदस्यता में विभिन्नता, प्रशांत-पार सांझेदारी जैसी प्रतिस्पर्धी प्रक्रियायें और वाशिंगटन से नियमित उच्च-स्तरीय ध्यान में कमी। पिछले दो सालों से व्यापारिक व्यय घटाने, तक्नीकी हस्तांतरण बढ़ाने और पूंजी निवेश को सरल बनाने जैसे व्यवहारिक प्रयासों पर ध्यान केन्द्रित रहा है। लीमा में व्हाइट हाउस ने जी-२० की दोहा दौर का विवाद निपटाने की शब्दाडंबरपूर्ण सहमति के नाम पर व्यापारिक उदारीकरण को गति प्रदान करने का प्रयास किया। वैश्विक व्यापार वार्ताओं के जटिल इतिहास को देखते हुये, यह संभव नहीं लगता कि राष्ट्रपतीय संक्रमण-काल में इस दिशा में कोई व्यवहारिक प्रगति दिखाई पड़ेगी। इसके बजाय, व्हाइट हाउस इस आर्थकि संकट के समय व्यापारिक मुद्दे उठा कर आने वाले राष्ट्रपति के लिये नई अंतरराष्ट्रीय प्रत्याशायें प्रस्तुत करेगा। आर्थिक टीकाकारों और प्रमुख कार्पोरेशनों ने इसका समर्थन किया है। फिर भी, वर्तमान आर्थिक और राजनीतिक माहौल में जबकि अमरीकी संसद में संरक्षणवादी विचारो का बोलबाला है, हमें किसी नई व्यापारिक पहल की सफलता पर संदेह है। 


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