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जी-२०: एक सांकेतिक पर एहम मील-का-पत्थर

Published on: November 23rd 2008 20:16:49
हालांकि १५ नवंबर का शिखर सम्मेलन व्हाइट हाउस ने बुलाया था, राष्ट्रपति बुश की उसमें एहम भूमिका नहीं रही। उन्होंने सम्मेलन शुरू होने से पहले का अधिकांश समय कुछ मुद्दों का विरोध करने में लगाया। इस दौोरान अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आई०एम०एफ़) ने २००९ में विकास की संशोधित अंतरराष्ट्रीय संभावनायें जारी की। इसके अनुसार, विकास-दर अक्तूबर में  /४ प्रतिशत से नीचे आकर २.२% पर स्थिर हुई। इससे बुश को संदेह हूआ कि योरोप और उभरती हुई एशियाई अर्थव्यवस्थायें सम्मेलन पर हावी हो जायेंगी। अमरीकी वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने इन देशों की आर्थिक नेतृत्व प्रदान करने की राजनीतिक लालसा को भी बुश की सम्मेलन के प्रति बेरूखी का कारण बताया। लेकिन अमरीकी अधिकारियों ने निजी तौर पर उन प्रत्याशाओं का तरजीह नहीं दी जिनमें वर्तमान अंतरराष्ट्रीय नियामक माहौल में मूलचूल परिवर्तन करके उसे ब्रिटेनउड-२ समझौते का रुप देने की बात कही जा रही थी। उनका तर्क था कि इसके लिये न तो कोई समन्वित विषय-सूची है और न ही नीति-परक ज़मीनी तैयारी। सम्मेलन की उपयोगिता व्हाइट हाउस द्वारा नीति-निर्माण के दायरे को सीमित करने से भी कम हुई। तर्क यह था कि वाशिंगटन में जारी संक्रमण-काल में ओबामा प्रशासन के आने का इंतज़ार है। इसलिये, इस बात पर आश्चर्य नहीं है कि बैठक के आई०इम०एफ० आपातकाल कर्जे़ में विस्तार, बैंकिंग और वित्तीय वर्तमान नियामक कार्यकारी दलों की स्थापना और समन्वित आर्थिक सहायता संबंधी नतीजे कुछ ख़ास नहीं रहे। लेकिन अधिक एहम बात थी भागीदारों की विसतृत सूची। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने हमे इस संबंध में बताया कि: इस समय हम भले ही यह महसूस न करें, लेकिन दूसरे विश्व युद्द के बाद स्थापित अर्थव्यवस्था का अब अंत हो रहा है। क्या कोई नया ढांचा जल्द उभरेगा? यह अनिश्चित है लेकिन यह तय है कि नई आर्थिक शक्तियां भविष्य में अपनी आवाज़ बुलंद करने का अवसर मांगेगी

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