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मध्यपूर्व शांति प्रक्रिया: विलंब की संभावना

Published on: November 23rd 2008 20:17:03
ऐनापोलिस सम्मेलन के बाद, विदेश मंत्री राइस की मध्यपूर्व की आठवीं और संभवत: अंतिम यात्रा के दौरान, उनका गंभीर स्वर २००८ के प्रशासन की थकान ज़ाहिर करता है। इज्रायल की कदीमा सरकार और फ़िलिसतीनी प्राधिकरण तथा उसकी प्रतिद्वंदी हमास के अंदर जारी अनबन उनके रास्ते में रुकावट बन कर सामने आये। लेकिन गतिरोधित वार्तायें राष्ट्रपति बुश की अपनी जमा राजनीतिक हैसियत दांव पर लगाने की अक्षमता या अनिच्छा भी प्रदर्शित करती हैं। जैसा कि हम संकेत दे चुके हैं, ओबामा की अंतरराष्ट्रीय विवादों पर संवाद जारी रखने और खुल कर वार्तालाप करने के नारे पर चुनाव में विजय से काफी अधिक प्रत्याशायें जाग्रत हुई है। लेकिन राजनीतिक और सामरिक हकीकतों के प्रभाव से यह यकीनन कुछ कम होंगी। ओबामा प्रशासन सत्ता में आने के बाद सबसे पहले अपना ध्यान घरेलू आर्थिक चिंताओं पर केन्द्रित करेगा। उसकी विदश नीति की विषय-सूची पर इराक और अफ़ग़ानिस्तान हावी रहेंगे। निर्वाचित-राष्ट्रपति ओबामा द्वारा रेहम एमेनुयल की चीफ़-आफ़-स्टाफ़ पद पर तत्काल नियुक्ति और डेनिस रास की मध्यपूर्व में किसी उच्च पद पर तैनाती इस बात का संकेत देती है कि उनकी तात्कालिक और मध्यम-कालिक नीति यथा-स्थिति बनाये रखना होगी। दूसरा, ओबामा को बुश से संकटपूर्ण राजनीतिक स्थिति विरासत में मिलेगी। इज्रायल में मध्य-फ़रवरी के चुनाव के बाद गठबधन निर्माण करने में लगने वाला विलंब और फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण तथा हमास के बीच बना गतिरोध भी यही संकेत देता है कि मध्यपूर्व में अगले वर्ष देर गये तक किसी कारगर पहल की संभावना को टालना पड़ेगा।

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