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रूस: कड़ी कूटनीतिक रूझान

Published on: November 23rd 2008 20:17:47
रूसी राष्ट्रपति मेदविदेव के चार नंबबर के पहले संसदीय भाषण का अमरीका-विरोधी स्वर और उनकी राष्ट्रपति ओबामा के चुनाव-परिणाम पर सारी दुनिया से अलग नकारात्मक प्रतिक्रिया अमरीका-रूस संबंधों के वर्तमान उतार-चढ़ाव की स्थिति को रेखांकित करती है। उल्लेखनीय है कि भाषण में वर्तमान वित्तीय संकट उकसाने और रूस का घेराव करने के प्रयासों के लिये वाशिंगटन की फिर से आलोचना की गई है। इसके साथ ही क्रेमलिन ने पौलेंड में प्रस्तावित अमरीका मिसल प्रतिरक्षा ठिकानो को कम-दूरी के इस्कंदर मिसलों से निशाना बनाने की धमकी भी दी है।  वाशिंगटन के विश्लेषकों ने इन गतिविधियों के व्यवहारिक सैनिक नतीजो पर संशय व्यक्त किया है। लेकिन इसके राजनीतिक उद्देश्य स्पष्ट हैं। क्रेमलिन का घेराव मनोवृत्ति को उभारने में एहम हित है और इसी से वह देश में पनपे आर्थिक संकट से अपने को बचा सकता है। इसके अतिरिक्त, मदविदेव इस उम्मीद से संक्रमण-काल में अमरीका-रूस संबंधों में पहल हासिल करना चाहते हैं ताकि वैश्विक चुनौतियों से त्रस्त नये ओबामा प्रशासन से रियायतें हासिल की जा सके। बुश प्रशासन द्वारा निशस्त्रीकरण पर आगे वार्ताओं के प्रस्तावों को ठुकराने के बाद, मास्को ओबामा दल को मिसल प्रतिरक्षा नीति पर जवाब-देह स्थिति में लाना चाहता है। फिर भी, मदविदेव द्वारा ९ नवंबर को टेलीफोन वार्ता के दौरान ओबामा से संक्रमण-काल के फ़ौरन बाद द्विपक्षीय संपर्क शुरु करने का वचन लेना इस बाद का संकेत है कि क्रेमलिन योरोप की कुछ ज़्यादा दोस्ताना अमरीकी विदेश नीति की अपेक्षाओं के विरुद्ध नहीं जाना चाहता। वाशिंगटन के टीकाकार ओबामा की प्रतिक्रिया पर बड़े गौर से नज़र रखे हुये हैं। टीकाकारों को इस बात की कोईस संभावना नहीं है कि नये राष्ट्रपति आनन-फ़ानन में रूस के साथ कोई समझौता कर लेंगे। वे समझते है कि ओबामा क्रेमलिन विस्तारवाद के ख़िलाफ़ संयुक्त अतलांनतिक-पार रवैया अपना सकते हैं।

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