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ओबामा प्रशासन: पूर्वी एशिया में पुरानी विदेश नीति

Published on: November 16th 2008 22:55:29
सिनेटर ओबामा का चुनाव बुश प्रशासन की विदेश और आर्थिक नीतियों की विषय-सूची की आलोचना पर आधारित था। फिर भी, पहले की कुछ नीतियों के जारी रहने की संभावना है विशेष कर उस समय जब नये राष्ट्रपति पिछले आठ सालों से एशिया में चली आ रही अमरीकी नीति की समीक्षा करेंगे। ओबामा अभियान ने कई बार बुश प्रशासन के भारत के साथ सामरिक संबंध स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन किया था। इसक संकेत अमरीका-भारत गैर-सैनिक परमाणु समझौते के समर्थन से भी मिलता है। कुछ टीकाकारों ने व्यापारिक संबंधों में ढ़िलाई बरतने की शिकायत की है जबकि कुछ अन्य ने  कश्मीर में उनके मध्यस्तता करने के सुझाव पर निराशा व्यक्त की है। लेकिन कुल मिला कर, नये राष्ट्रपति का संदेश निकट सहयोग की प्रतिबद्धता का है वह भी विशेष रुप से आतंकवाद-विरोध और गुप्तचर सूचनाओं के आदान-प्रदान के क्षेत्रों में। अमरीकी वाणिज्य नीति में, ओबामा के रवैया में चीन के साथ संबंधों का विशेष महत्व बताया गया है। फिर भी, वैश्विक आर्थिक मंदी और बीजिंग की बढ़ती हुई वित्तीय शक्ति इस नीति पर अंकुश लगायेगी। ओबामा ने एक एहम टिप्पणी में कहा था की कि चीन न तो शत्रु है न मित्र। बुश प्रशासन की चीन के प्रति नीति में मानवाधिकारों को लेकर उससे शिकायते और चीनी मुद्रा के सही मूल्यांकन की रही है। बुश की ही तरह ओबामा इन दोनों में संतुलन स्थापित करके चीन से सहयोग का प्रयास करेंगे। ओबामा की उत्तर कोरिया के परमाणु निश्स्त्रीकरण के प्रति क्षेत्रीय-बहुराष्ट्रीय नीति के लिये भी बीजिंग से समन्वय ज़रूरी है। बुश प्रशासन की पुष्टीकरण प्रोटोकोल स्थापित करने मे प्राप्त सफलता नये प्रशासन को अपना उद्देश्य हासिल  करने में मददगार हो सकती है। उसका उद्देश्य अस्थाई ६-राष्ट्रीय वार्ताओं के स्थान पर वार्ताओं का एक संस्थागत आधार तैयार करना है।  पयांगयांग के साथ बराबर जारी संपर्क सभी क्षेत्रीय दावोदारों को पसंद नहीं आ सकता। इसलिये, यह विशेष तौर पर संभव है कि नये राष्ट्रपति को जापान के साथ संबंध फिर से शुरु करने की अपनी प्रतिबद्धता में एहम चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि जापान की उसके नागरिको के उत्तरी कोरिया द्वारा अपहरण की मांग को सुलझाना आसान नहीं। लेकिन अमरीका-जापान संबंधों का आधार होगा प्रधानमंत्री आसू के राजनीतिक व्यवस्था की जड़ता और जापान की भविष्य में क्षेत्रीय भूमिका का निर्धारण। अमरीका की एशिया में सामरिक नीति की सुरक्षा और विस्तार के सिलसिले में ओबामा को उसी मूल दुविधा का सामना करना पड़ेगा जो उनके पहले आये प्रशासन भुगत चुके हैं और वह है: उभरती हुई विभिन्न प्रकार की शक्तियों के हितों को समझते हुये क्षेत्रीय अमरीकी नीति की संरचना।     

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