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अमरीका-सऊदी संबंध: अभी भी जानदार हैं

Published on: November 16th 2008 22:55:43
सितंबर २००१ के बाद, इराक युद्ध पर अक्सर उभरने वाले उच्च-स्तरीय मतभेद, आतंकवादियों को उपलब्ध आर्थिक सहायता और ऊर्जा कीमतों की वृद्धि पर उपजे जनारोष के बावजूद, अमरीकी अधिकारी समझते हैं कि अमरीकी-सऊदी संबंधों ने अपनी दीर्घकालिक उपयोगिता को साबित कर दिखाया है। रियाद के तेल मंत्री अली अल नुमानी की तेल उत्पादन में कटौती संबंधी विवाद में न पड़ने की घोषणा ने उन्हें अमरीका की अर्थ   व्यवस्था की वैश्विक सेहत के साथ जोड़ा है। हमने निजी तौर पर आतंकवाद विरोधी गतिविधियों के विरुद्ध जारी समन्वय में हुये परिपक्कव सुधारों की ओर पहले भी ध्यान दिलाया था। यह समन्वय गुप्तचर और वित्तीय स्रोतो से संबंधित है। रिपोर्टों से पता चलता है कि इनका संबंध उन ९९१ संदिग्धों से है जिनके ख़िलाफ़ इस समय आतंकवाद के अभियोग पर मुकदमें कायम है। रियाद की हालिया सुरक्षा और आर्थिक नीतियां वाशिंगटन के हित में हैं। लेकिन उनका संबंध सऊदी अरब के उन दूरगामी सामरिक हितों से जुड़ा है जिन पर उसका वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक ढ़ांचा टिका हुआ है। सुरक्षा सहयोग घरेलू सुरक्षा को दरपेश ख़तरे को प्रतिबिंबित करता है। इस तरह, तेल के कम दामों के समर्थन के पीछे हाईड्रोकारबन अर्थव्यवस्था को बरकरार रखने की इच्छा झलकती है। उसके बदले में प्राप्त वित्तीय और राजनीतिक स्थायित्व बादशाहत को विसतृत क्षेत्रीय प्रभाव प्रदान करता है जिसका प्रदर्शन १५ अक्तूबर को उसके खाड़ी सहयोग परिषद से समन्वय के रूप में हुआ और उसे वाशिंगटन में १५ नंवबर को होने वाले जी-२० के सम्मेलन में भाग लेने का निमंत्रण मिला। इस तरह की रुझाने आगे चल कर द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को सशक्त बनायेंगी।   

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