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अफ्रीका: भारी समस्यायें, कम ध्यान

Published on: December 9th 2007 01:42:04
विदेश मंत्री राइस ने अपनी वर्तमान इथोपिया यात्रा के दौरान, कांगों, सुडान और उपसहारा अफ्रीका सहित कई मुद्दों पर बैठकें की। यह दौरा अब समाप्तप्राय है और इसके साथ ही यह सवाल उठ रहा है कि क्या अफ्रीका को वाशिगंटन में अधिक प्राथमिकता दी जा रही हैं। हालांकि राष्ट्रपति बुश ने अफ्रीका को ऐडस निवारण के लिये मिलने वाली अमरीकी आर्थिक सहायता को काफी बढ़ा दिया है और प्रतिरक्षा मंत्रालय ने हाल ही में अफ्रीका कमान की स्थापना की है, हमारे सूत्र बताते हैं कि अफ्रीका को मिलने वाला उच्च्-स्तरीय ध्यान प्रासंगिक है। जहां तक सुडान और कांगों संघर्षों का संबंध है, अमरीका अपने सहयोगियों के साथ निर्धारित की गई नीति पर कायम है और इसका केंन्द्र आमतौर पर राष्ट्रसंघ होता है।  अमरीकी अधिकारी डारफर की कडे शब्दों में चर्चा तो ज़रूर करते हैं लेकिन वहां अमरीकी सैनिकों के तैनात किये जाने की संभावना बहुत कम है। अन्य वैश्विक मुद्दों की तरह, अमरीका ने आर्थिक प्रतिबंध लगा कर सुडान सरकार पर दबाव डालने की कोशिश की हैं। लेकिन विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने हमें बताया कि जितना ज़्यादा हम डारफर समस्या को देखते है वह उतनी ही ज़्यादा जटिल दिखाई पड़ती है। हम उससे जुड़े तो रहेंगे पर दूर से। इसके बजाय, अमरीका का मुख्य ध्यान अफ्रीीका में ऐसी सरकारों के उभरने से रोकना है जो अमरीका-विरोधी गुटों को पनाह देती हैं। इसलिये, अमरीका सोमिलिया में अधिक दिलचस्पी लेकर वहां स्थायित्व बहाल करने का प्रयास कर रहा है। इसी उद्देश्य से प्रतिरक्षा मंत्री गेट्स ने तीन दिसंबर को अमरीकी सेना के जबूती स्थित अड्डे का दौरा किया। यहां अमरीका सारे हार्न आफ़ अफ्रीका क्षेत्र में कार्रवाई के लिये एक संयुक्त टास्क फ़ोर्स रखे हुये है। अमरीका के अफ्रीका में दिलचस्पी लेने के एक और कारण चीन से प्रतिस्पर्धा है जो विशेष रुप से ऊर्जा और खनिज पदार्थों को लेकर है। ,    

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