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विदेशों में अमरीका: राजनियकों के स्थान पर सैनिक

Published on: November 11th 2007 12:58:27
एक गणना के अनुसार, विदेश मंत्रालय में कुल कर्मचारियों की संख्या एक अमरीकी विमान-वाहक पोत पर तैनात सैनिकों की संख्या से कम है और अमरीकी नौ सेना के पास इस तरह के आठ पोत हैं। धन के प्रावधान में भी ज़मीन-आसमान का फ़र्क है: वर्ष २००८ के लिये, विदेश मंत्रालय का बजट लगभग दस अरब डालर रखा गया है जबकि प्रतिरक्षा मंत्रालय को ४६० अरब डालर मिलेंगे। इसके अतिरिक्त उसे २०० अरब डालर इराक और अफ़ग़ानिस्तान युद्ध के लिये मिलेंगे। धन आंवटन के इस असंतुलन से विदेश विभाग नाख़ुश है, विशेषकर इसलिये भी कि विदेश सेवा के अधिकारियों को बग़दाद जैसे दूतावासों में तैनात किया जाता है जहां, कुछ लोग यह भी समझते हैं कि सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। इससे भी गंभीर बात यह है कि अमरीकी राजदूत, अपने विदेशी सरकारों के साथ लेन-देन में अक्सर यह महसूस करते हैं कि उनके अधिकार अपने पेंटागन के सहकर्मियों के मुकाबले कम हैं। सैनिक सहायता मानवीय सहायता से दो गुणा अधिक है। विदेश मंत्रालय की बहुत सी नीतियां पेंटागन के संभारतंत्र पर आधारित हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अफ़ग़ानिस्तान में जारी सहायता कार्य है। पेंटागन का संघठनीय ढ़ाचा सेना की कूटनीतिक भूमिका का प्रतिनिधित्व करता है। नीति मामलों के अवरमंत्री विश्व भर में द्विपक्षीय संबंधों के नेटवर्क पर नज़र रखते हैं। ५-६ नवंबर को प्रतिरक्ष मंत्री गेट्स की चीन यात्रा जैसे दौरे विशेष द्विपक्षीय महत्व रखते हैं। कोंड़ोलीज़ा राइस सहित, लगभग सभी नये आने वाले विदेस मंत्रियों ने धन आंवटन के इस अंतर को पाटने की कोशिशें की लेकिन सफल नहीं हुये। अधिकार वास्तब में यह असंतुलन बढ़ रहा है। हम समझते है कि विदेश नीति के क्षेत्र में अब पेंटागन के विचार अधिक निर्णायक माने जायेंगे।

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