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रिपब्लिकन पार्टी: क्या चेनी असंतोष का लाभ उठा सकेंगे?

Published on: June 24th 2007 16:51:41

१३ जून को राष्ट्पति बुश ने वर्ष २००८ में संसदीय चुनाव जीतने और सिनेट तथा प्रतिनिधि सभा में बहुमत प्राप्त करने का अभियान शुरू किया। उनके आशावादी शब्दों के बावजूद, रिपब्लिकनों में निराशा के संकेत बढ़ रहे हैं। अप्रवास विधेयक पर बहस के दौरान सामने आये मतभेद, इराक की स्थिति को लेकर घबराहट और पार्टी के राष्ट्रपतीय उम्मीदवारों के प्रति उत्साह की कमी जैसे कुछ कारणों से बहुत से रिपब्लिकन २००८ के चुनावों में पार्टी की संभावनाओं के प्रति आशावान नहीं हैं। एक वरिष्ठ रिपब्लिकन ने हमें बताया कि हम अपने अगले राष्ट्रपतीय चुनाव में डैमोक्रैट पार्टी की विजय के लिये अपने को तैयार कर रहे हैं। बुश की पार्टी में एकता कायम रखने की समस्यायें ऊपर से शुरू होती हैं। सिनेट में रिपब्लिकन नेता मिच मैकानल जोकि बुश के बहुत ही भरोसेमंद विश्वासपात्र माने जाते हैं, उन्होंने राष्ट्रपति को उनकी नीति से पार्टी में उत्पन्न निराशा से अवगत करा दिया है। जैसे जैसे बुश का संसदीय समर्थन लुप्त हो रहा है, वाशिंगटन में यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या उपराष्ट्रपति डिक चेनी इस स्थिति का लाभ उठा कर अपनी विदेश नीति को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे? मूल मुद्दा ईरान है। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा हाल ही में की गई ईरान की कड़ी आलोचना के बावजूद, चेनी समझते हें कि वे ईरान के विरुद्ध अपने सैनिक कार्यवाही के तर्क के प्रति समर्थन खो रहे हैं। रिपब्लिकान पार्टी में बुश की नीतियों पर उत्पन्न असंतोष का लाभ उठा कर चेनी ससंद में और रिपब्लिकन पार्टी की राष्ट्रपतीय टिकट के दावेदारों में ईरान के प्रति कड़े रवैये की अपनी नीति के लिये समर्थन जुट सकते हैं। रिपब्लिकना पार्टी के दो प्रमुख राष्ट्रपतीय उम्मीदवारों ने इस मुद्दे पर कड़े बयान जारी किये हैं।

 

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