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पाकिस्तान: उभरता हुआ संकट

Published on: June 24th 2007 16:52:20

पाकिस्तानी राष्ट्पति परवेज़ मुशर्रफ द्वारा मार्च में मुख्य न्यायाधीश इफ्तिख़ार मुहम्मद चौधरी की बर्ख़ास्तगी पर उभरी राजनीतिक अस्थिरता अमरीकी अधिकारियों के लिये गहरी चिंता का कारण बना हुई है। उनका आंकलन है कि मध्यम वर्ग और व्यापारी समुदाय का समर्थन खो देने के बाद, अफग़ानिस्तान में अमरीकी नीतियों के लिये समर्थन जुटाने और आतंकवाद विरोधी युद्ध के लिये के लिये जनरल मुशर्रफ का महत्व कम हो गया है। लेकिन फ़िर भी जैसा कि हमारे व्हाइट हाउस के सूत्रों ने बताया, गुप्तचर आंकलन यह भी है कि वे मौजूदा चुनौती को सफलतापूर्वक झेल लेंगे। इसलिये, अमरीकी अधिकारी रूढ़ीवादी रिपब्लिकनों की उन्हें हटाने की मांग पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसके बजाय, वे मुशर्रफ़ को राजनीतिक सुधारों की मांगों को पूरा करने का ज़ोर दे रहे हैं। हमें बताया गया है कि अमरीका की सबसे बड़ी चिंता यह है कि मुशर्रफ इस सलाह को नहीं मानेंगे और इस वर्ष के अंत में होने वाले चुनावों में हेराफरी का सहारा लेंगे। विदेश मंत्रालय में दक्षिण एशिया मामलों के वरिष्ठ अधिकारी रिचर्ड बाउचर इसी संदेश के साथ इस्लामाबाद गये थे। अपनी १२-१५ जून की पाकिस्तान यात्रा के दौरान उन्होंने जनरल मुशर्रफ़ से भी बातचीत की। पाकिस्तान में धर्मनिर्पेक्ष इलीट और इस्लामी रूढ़ीवादियों में बढ़ते हुये अमरीकी विरोध को लेकर भी अमरीकी अधिकारी बहुत चिंतित हैं लेकिन वे बहुत ही सावधान बरत रहें हैं ताकि उन पर पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप करने का आरोप न लगे। लेकिन निजी तौर पर वे कुछ ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें में पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो को पाकिस्तान आने का आज्ञा दी जाये और यदि वे चुनाव जीतती है तो उन्हें मुशर्रफ के साथ सत्ता में भागेदारी का अवसर भी दिया जाये। भुट्टो डैमोक्रैटिक राष्ट्रपतीय उम्मीदवार हेलरी क्लिंटन के काफी करीब हैं और क्लिटन के राष्ट्रपति बनने की स्थिति में, वे शक्तिशाली अमरीकी समर्थन की प्रत्याशा कर सकती हैं।


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