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मध्य एशियाई ऊर्जा प्रतिस्पर्धा

Published on: June 19th 2007 16:42:26
 मध्य एशिया से संबंधित अमरीकी कूटनीतिक गतिविधियों बराबर जारी हैं। ३० मई को उपराष्ट्रपति डिक चेनी के स्टाफ के सदस्य जोसेफ वुड ने अज़रबयजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीरेव से बातचीत की। जून के शुरु में विदेश मंत्रालय के दो अधिकारी रिचर्ड बाउचर और स्टीवन मान ने कज़ाकिस्तान और तुर्कमानिस्तान की यात्रा की थी। इन यात्राओं से इस रूझान की पुष्टि होती है जिसकी ओर हमने पहले भी ध्यान दिलाया था। पर्दे के पीछे, अमरीका का ध्यान तुर्कमानिस्तान पर विशेष रुप से है। इन यात्राओं का उद्देश्य कैसपियन सागर के नीचे पाइपलाईन के निर्माण के प्रस्ताव की संभावनाओं को बनाये रखना है जोकि मौजूदा नेटवर्क से जुड़ कर तुर्कमानी गैस को मैडिटरेनियन पहुंचाया जा सके। इस प्रस्ताव को धक्का उस समय लगा जब रूस, तुर्कमानिस्तान और कज़ाकिस्तान, रुस से जोड़ने वाली उस वैकल्पिक पाइपलाईन पर सहमत हो गये जिससे गैस को आगे योरोप निर्यात किया जायेगा। इस समझौते से रूस की विशाल ऊर्जा कंपनी गाज़प्रोम और मज़बूत होकर उभरी है। अमरीका की निगाह में यह रूस को यूक्रेन और तुर्की जैसे देशो पर राजनीतिक दबाव बनाने का अवसर प्रदान करेगी। ये वे देश हैं जिन्हें अमरीका पश्चिम-समर्थक खेमे में रखना चाहता है। लेकिन अमरीकी अधिकारी अभी भी इस समझौते को कमज़ोर करने की उम्मीदे लगाये बैठे हैं। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने हमें बताया कि बर्दीमुखादेव ने हमें संकेत दिया है कि वे १०० प्रतिशत मास्को पर निर्भर नहीं रहना चाहते। हमारी योजनायें अभी जारी हैं।  

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