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ईरान: सुन्नी अलगाव

Published on: June 19th 2007 16:42:50
ईरान के संबंध में आगे की नीति को लेकर वरिष्ठ अमरीकी अधिकारियों में मतभेद बने हुये हैं। पहली जून को विदेशमंत्री कोंडोलीज़ा राइस की उस समय अजीब हालत हुई जब उन्हें उन आरोपों का खंडन करना पड़ा जिनमें कहा जा रहा है कि उपराष्ट्रपति डिक चेनी उनकी कूटनीतिक रुझान को क्षति पहुंचा रहें हैं। हमारे प्रशासन के सूत्र इस बात के पुष्टि करते हैं कि राइस की वर्तमान नीति को राष्टपति बुश और प्रतिरक्षा मंत्री बाब गेट्स का समर्थन प्राप्त है। लेकिन चेनी के निकटवर्ती अधिकारी, विशेष रुप से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के इलियट अब्राहम, बताते हैं कि वे अभी भी यह समझते हैं कि अंततोगत्वा सेना पर आधारित समाधान आवश्यक होगा। लेकिन अमरीका के रूढीवादी अरब सहयोगियों सऊदी अरब, मिस्र, जोर्डन और खाड़ी राज्यों का ईरान के प्रति आक्रामक नीति के लिये समर्थन हासिल करने की उनकी उस रणनीति को आघात लगा है जिसे हमने सुन्नी रणनीति कहा था। यह रणनीति ईरान के उभार और इराक के ईरानी प्रभाव क्षेत्र में एक प्रमुख शिया तेल उत्पादक के शमिल होने से उत्पन्न सुन्नी भय पर आधारित थी। अब्राहम ने इस रणनीति को आगे बढ़ाने में सऊदी राष्ट्रीय सलाहकार प्रिंस बंदर बिन-सुल्तान से मिल कर काम किया था। हम सुनते हैं कि इस योजना को सऊदी शाह अब्दुला के कहने पर अब ताक पर रख दिया गया है। शाह अब्दुला ने प्रिंस बंदर से अपने को कुछ अलग कर लिया है और बंदर आजकल अपना अधिक समय अपने लंदन या अमरीका के घर में बिता रहे हैं। ईरान के ख़िलाफ़ क्षेत्रीय समर्थन जुटाने की रणनीति की असफलता से उन लोगों के हाथ मज़बूत हुये हैं जो ईरान के प्रति नपा-तुला रवैया अपनाना चाहते हैं।

 


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