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भारत: परमाणु समझौते पर दिक्कतें

Published on: June 19th 2007 16:43:13
अमरीका-भारत गैरसैनिक परमाणु समझौते को लागू करने के लिये दरकार १२३ समझौते पर जारी वार्ताओं में बहुत ही धीमी गति से प्रगति हो रही है। दो तकनीकी कठनाइयां विशेष रुप से विचारधीन हैं। पहली का संबंध परमाणु ईधंन के दोबारा इस्तेमाल यानी पुन: प्रसंस्करण को लेकर है क्योंकि अमरीका अस्त्र-योग्य पदार्थों के उत्पादन को कम करना चाहता है। दूसरी समस्या परमाणु परीक्षण है। इस मामले में भारत यह आश्वासन चाहता है कि यदि वह परमाणु परीक्षण करता है तो अमरीका उस पर प्रतिबंध नहीं लगायेगा। विदेश मंत्रालय के अधिकारी हमें बताते हैं कि वे इन दोनों समस्यायों को हल कर लेंगे। संभावना यह है कि प्रस्तावित १२३ समझौता भारत को राष्ट्रीय आपात स्थिति में परमाणु परीक्षण की आज्ञा देगा। इसमें शामिल है पाकिस्तान या चीन द्वारा परमाणु परीक्षण। लेकिन गंभीर समस्या भारत के ईरान के साथ संबंधों को लेकर है। इस मुद्दे पर संसद, विशेषकर प्रतिनिधि सभा की प्रभावशा‍ली परमाणु अप्रसार समिति, की चिंता बढ़ रही है। समिति का आरोप है कि भारतीय व्यापार अमरीकी प्रतिबंधों का उलंघन करते हुये ईरानी तेल निर्यात के साथ सहयोग कर रहा है। एक और समस्या है इज़्रायली प्रतिरक्ष उद्योग। वह समझता है कि अमरीका-भारत घनिष्ट संबंध उसके भारत के साथ लाभदायक निर्यात के लिये ख़तरा हैं। इसलिये, इज़्रायली प्रतिरक्ष उद्योग चुपचाप तथा सधे ढ़ंग से इज़्रायल-समर्थक सासंदों में भारत के ईरान के साथ संबंधों पर ज़ोर दे रहा है ताकि परमाणु समझौते को रोका जा सके। अगर भारत सरकार इन आरोपों के बारे में स्पष्टीकरण नहीं देती तो, अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, यह समझौता नाकाम हो सकता है। लेकिन हमें अभी भी प्रत्याशा है कि यह समझौता सफल होगा क्योंकि दोनों पक्षों ने, विशेषकर राष्ट्पति बुश, ने इस पर काफी मेहनत की है।  

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