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जापान और चीन: अमरीका द्वारा दोहरी दोस्ती की कोशिश

Published on: June 19th 2007 16:43:40
सिंहापुर में पहली से तीन जून तक चले प्रतिरक्षा सम्मेलन में प्रतिरक्षा मंत्री बाब गेट्स ने अपनी चीनी आलोचना का स्वर कुछ धीमा कर दिया और अमरीकी प्रशांत कमान के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने चीनी समकक्षों से बातचीत की। यह उनकी और पेंटागन के अन्य अधिकारियों से पहले हुई उस संसदीय गवाही की ठीक विपरीत थी जिसमें उन्होंने इस आशय के बयान दिये थे कि अमरीकी सुरक्षा व्यय अब अंशत: चीन के ख़तरे पर निर्भर करेगा। स्वर में यह परिवर्तन चीन को लेकर अमरीका में जारी बहु-अय्यामी बहस का प्रतिनिधित्व करता है। मूल रूप से आर्थिक और भू-राजनीतिक तत्व एक दूसरे के ठीक विपरीत हैं। वित्तमंत्री हैंक पालसन बराबर चीनी बाज़ार से अमरीका को होने वाले फायदों की बात करते हैं। चीन-विरोधी तत्व बृहत मान्यतायों और सैनिक मुद्दों पर बल देते है। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकारी हमें बताते हैं कि चीन पर एक ही समय में कई पक्षों पर बहस होगी। लेकिन पेंटागन के विकल्प स्पष्ट हो रहे हैं। सम्मेलन के बाद, वरिष्ठ अधिकारियों ने द्विपक्षीय वार्ताओं के लिये जापान की यात्रा की। इन वार्ताओं का उद्देश्य मिसल प्रतिरक्ष प्रणाली के प्रति जापान की भागेदारी को सशक्त बनाना है। इस प्रणाली में आस्ट्रेलिया भी शामिल है। राइस ने इस विषय पर २४ मई को आस्ट्रेलिया से विचार-विमर्श किया था। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह वार्तायें बहुत ही जंरुरी हो गई हैं। जापानी प्रधानमंत्री ऐबे की लोकप्रियता में कमी से हम घबरा गयें हैंहमें बताया गया है कि आस्ट्रेलिया मे इस वर्ष बदलाव आना है। इससे पहले कि चीन की चेतावनी उन्हें अपने रवैये में परिवर्तन के लिये मजबूर करे, हमें  प्रगित करनी होगी।

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