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भारत: क्या परमाणु समझौता बच पायेगा?

Published on: April 29th 2007 12:51:30
१९ अप्रैल को केप टाऊन में हुई परमाणु आपूर्ति समूह की बैठक में अमरीका-भारत गैर सैनिक समझौते पर अनौपचारकि रुप से चर्चा हुई। अमरीकी अधिकारियों में इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि समझौता ख़तरे में पड़ गया है क्योंकि भारत अपने परमाणु परीक्षण करने का अधिकार बरकरार रखना चाहता है। लेकिन अमरीकी और भारतीय सरकारों के पास  समझौते को सफल बनाने के सशक्त कारण भी हैं। अमरीका जापान और आस्ट्रेलिया के साथ अपने उभरते हुये सुरक्षा नेटवर्क में भारत को एक सामरिक पुरुस्कार के रुप में देखता है, जैसा कि इस महीने के संयुक्त नौ सैनिक अभ्यास से स्पष्ट होता है। अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये प्रशासन पहले ही भारत को परमाणु प्रसार का विरोध और ऐजिस राडार सिस्टम कि पेशकश के रुप में कुछ एहम रियायते दे चुका है। जवाब में, भारत ने अमरीकी मिसल प्रतिरक्षा सुविधाओं को अपने यहां लगाने की अनुमति दी है। अमरीकी गुप्तचर अधिकारी यह भी बताते हैं कि भारत का परमाणु अस्त्र कार्यक्रम इतना विकसित हो चुका है कि उसे निकट भविष्य में परीक्षण करने की ज़रुरत ही नहीं है। इसलिये, हम समझते हैं कि कोई समझौता हो जायेगा, भले ही वह बहुत स्पष्ट न हो।   

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