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मुद्रायें: वित्त मंत्रालय में अंशकायें और प्रत्याशायें

Published on: April 29th 2007 12:51:52
१४-१५ अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आई० एम० एफ०) और विश्व बैंक की वंसत कालीन बैठक में परदे के पीछे जिस मुद्दे की सबसे अधिक चर्चा रही, वह यह था कि अमरीकी डालर के लिये फ़ैसले की घड़ी आ गई है। सात राष्ट्रों के समूह जी-७ के मंत्रियों ने अपने बयान में कहा कि मुद्रा दरों को अर्थ व्यवस्था की मूल स्थिति को प्रदर्शन करना चाहिये। लेकिन वित्त मंत्रालय के अपने संपर्को से हम सुनते हैं कि इस सांकेतिक भाषा का अर्थ था डालर और चीनी मुद्रा युआन के मुल्यों में बदलाव। सार्वजनिक रूप से वित्त मंत्री हैंक पालसन चीन के साथ स्थिर संबंध रखने के प्रति प्रतिबद्ध है और इस आशय का एक और भाषण उन्होंने २० अप्रैल कि दिया भी है, लेकिन वे अब इस निष्कर्ष  पर पहुंचे हैं कि चीनी निजी तौर पर मनाने की कार्यवाही से मानने वाले नहीं और अमरीका को डालर-युयान के अनुपात को वास्तविक रुप देने के लिये सीधी कार्यवाही करनी पड़ेगी। इसमें शामिल है ब्रिटिश और योरो क्षेत्र के साथियों के साथ एक मौन समझौता जिसमें वह अपने ब्याज की दर बढ़ायेंगे। अपने यहां मुद्रा स्फीति रोकने के लिये वह पहले से ही इस कदम के लिये तैयार हैं। ठीक इसके समांतर अमरीकी अधिकारी सऊदी और संयुक्त अरब अमीरात के तेल उत्पादकों को गर्मी के अधिक खपत वाले मौसम में उत्पादन न बढ़ाने के लिये उत्साहित कर रहे हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य डालर को नीचे लाने के लिये संयुक्त दबाव डालना है। वित्त अधिकारी जानते हैं कि उन्हें इस भावना को फैलने से भी रोकना है कि अमरीका ने अपनी मज़बूत डालर की पारम्परिक नीति छोड़ दी है क्योंकि उस स्थिति में डालर के मूल्य में तेज़ गिरावट आ सकती है। हम योरोप के सात निकट का सहयोग कर रहे हैं, एक वित्त अधिकारी ने बताया। अगर ज़रूरी हुआ तो वे डालर को बचाने के लिये कदम उठायेंगे

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