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अल-कायदा: कम समझना ख़तरनाक

Published on: April 29th 2007 12:53:01
इराक और अफग़ानिस्तान में प्रगति न होने के कारण, प्रशासन में अल कायदा पर जारी बहस आंखों से ओझल हो गई है। व्हाईट हाऊस के सार्वजनिक बयानों में ओसामा बिन लादिन और उसके प्रभाव से ध्यान हटाने की कोशिश हुई है। गुप्तचर विभाग के विशेषज्ञों का मत है कि अल कायदा उतना ही ख़तरनाक है जितना कि वह पहले कभी था। एक विश्लेश्क ने हमें बताया कि इस तथ्य ने कि हम ओसामा को हम नहीं पकड़ पाये, उसकी प्रतिष्ठा में बहुत वृद्धि हुई है। अब उसका नियंत्रण बरकरार है या नहीं, यह बात बेमतलब है। विशेषज्ञों का आंकलन है कि अमरीका को महत्वपूर्ण सक्रियवादियों को मारने में सफलता जो ज़रूर मिली है पर संगठन को उनकी क्षतिपूर्ति करने में भी कोई दिक्कत पेश नहीं आई। इस आशय की एक टिप्पणी यह है कि उनकी पकड़ हमसे कही अधिक गहरी है। अमरीकी विश्लेषक अपनी संगठन के पराशिक्षण केंद्रों को नष्ट करने की क्षमता की प्रभावशीलता पर पुनर्विचार कर रहे हैं। वे समझते हैं कि जुलाई २००५ के लंदन बम विस्फोट और अगस्त २००६ का विमान षड़यंत्र पाकिस्तान के वज़ीरस्तान क्षेत्र की यात्रा पर निर्भर थे, लेकिन अल्जीरिया में ११ अप्रैल को हुये बम विस्फोटों का पाकिस्तान से कोई सीधा संबंध नहीं लगता। विश्लेषक समझते हैं कि अल कायदा अब अपना निर्देश और नियंत्रण व्यवस्था इंटरनेट द्वारा संचालित करता है और अपनी शाखाओं से उसका संपर्क कार्यकर्ताओं के ज़रिये नहीं है। वे इराक में अमरीकी मौजूदगी को अमरीका के लिये एक न सुलझने वाली दुविधा के रूप में देखते हैं: अगर हम छोड़ दे तो अल कायदा फले फूलेगा; हमारे वहां रहने से, उन्हें प्रचार का अवसर मिलता है। लेकिन हम किसी नई नीति के उभरने के संकेत भी देखते है। व्हाईट हाऊस के एक अधिकारी ने हमे बताया कि: हमने बेहतर अस्त्र प्रयोग किये और असफल रहे। अब हमें बेहतर विचारों का इस्तेमाल करना होगा 

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