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उर्जा और मध्य एशिया: गौज़प्रौम का जवाब तुर्कमानिस्तान

Published on: April 29th 2007 12:53:39
अमरीका द्वारा रूस की विशाल उर्जा कंपनी की आलोचना वाशिंगटन और मास्को के बढ़ते हुये परस्पर संदेह को उजागर करती है। ब्रूसेल्स के अपने १७ अप्रैल के इंटरव्यू में विदेश मंत्रालय के योरोपियाई मामलों के ज़िम्मेदार अधिकारी मैथ्यू ब्राईज़ा ने गौज़प्रौम को एकाधिकारवादी बताया। ऐसा करके वे राष्ट्रपति बुश द्वारा जर्मन चांसलर ऐंजिला मरकल को योरोप में गौज़प्रौम के आकार की कंपनी खड़ी करने की निजी तौर पर जनवरी में दी गई सलाह को दुहरा रहे थे। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने हमें बताया कि उन्हें जर्मन उर्जा कंपनी ई-ओन की यह हैसियत प्राप्त करने में असफलता पर निराशा हुई है। जैसा कि हम पहले कह चुके हैं अमरीकी नीति अब पाइप लाइन निर्माण को रूस से दूर ले जाने पर केंद्रित है। इस उद्देश्य से विदेश मंत्रालय, राष्ट्रपति गुरबांगुली के नेतृत्व वाली नई तुर्कमानिस्तान की सरकार से अपने संबंध सुधार रहा है। हमेशा की तरह मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता समस्यायें खड़ी कर रहे हैं, विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया। पूर्व राष्ट्रपति नियाज़ोव के कार्यकाल में हमारे हाथ बधें हुये थे। लेकिन बर्दीमुखामिदोव के प्रति बहुत सी नाख़ुश मानवाधिकार संस्थाओं का रवैया सकारात्मक है। सबसे बड़ा अमरीकी उद्देश्य है पश्चिम में तुर्कमानी गैस को भूमध्य सागर और दक्षिण में अफग़ानिस्तान,  पाकिस्तान और भारत भेजना है। अमरीकी अधिकारियों का आंकलन है कि गौज़प्रौम अप्रत्यक्ष रूप अपने यूक्रेन और योरोप के उपभोगताओं को सप्लाई के लिये तुर्कमानी गैस पर निर्भर करती है। अगर वे तुर्कमानी गैस को रूस को न मिलने दे तो वे योरोप में रूसी प्रभाव को व्यापक रूप से कम कर सकते हैं। तुर्कमानिस्तान से बेहतर संबंध अमरीका के सामरिक महत्व के देश उज़बेकिस्तान और कज़ाकिस्तान से अच्छे संबंधों का रास्ता भी खोल सकते हैं।

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